हरिद्वार महाकुंभ का मास्टर प्लान: भगदड़, आगजनी और आपदा से निपटने को बनेगी स्पेशल एसओपी,मॉक ड्रिल से परखी जाएगी तैयारी

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देहरादून। हरिद्वार कुंभ-2027 में करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संभालने के लिए सरकार ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। कुंभ के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जल्द ही विशेष स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार की जाएगी। इसमें आगजनी, भगदड़, दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या अन्य किसी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में किस विभाग की क्या जिम्मेदारी होगी और कितनी तेजी से कार्रवाई करनी है, इसका पूरा खाका तैयार किया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि एसओपी  किसी एक विभाग की योजना नहीं होगी। कुंभ से जुड़े सभी प्रमुख विभाग अपने सुझाव और अनुभव साझा करेंगे। इसके बाद तैयार एसओपी की मॉक ड्रिल के जरिए जमीनी परीक्षा भी होगी। ड्रिल में आपात स्थिति की सूचना मिलने से लेकर राहत-बचाव दल के मौके पर पहुंचने, भीड़ को नियंत्रित करने और विभागों के बीच समन्वय तक की पूरी प्रक्रिया परखी जाएगी।

हरिद्वार में कुंभ की शुरुआत 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के स्नान के साथ होगी और करीब तीन महीने चलने वाला आयोजन 14 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के साथ संपन्न होगा। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है। प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या अचानक कई गुना बढ़ सकती है। ऐसे में भीड़ प्रबंधन प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। सरकार का फोकस केवल भीड़ को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है। यातायात, पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन समेत सभी व्यवस्थाओं को एक साथ मजबूत किया जा रहा है। कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में किसी भी छोटी घटना के बड़े रूप लेने की आशंका रहती है। आग लगने, भगदड़ मचने, किसी दुर्घटना या अचानक प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कुछ मिनट भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित एसओपी में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की जाएंगी। घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग की टीम कहां से रवाना होगी, किस अधिकारी को तत्काल सूचना दी जाएगी, राहत एवं बचाव दल किस रूट से मौके पर पहुंचेगा और भीड़ को सुरक्षित स्थान पर कैसे ले जाया जाएगा—इन सभी पहलुओं को एसओपी में शामिल किया जाएगा। एसओपी तैयार करने को लेकर शासन स्तर पर बैठक हो चुकी है। इसमें कुंभ से जुड़े अधिकारियों के साथ विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में आपात परिस्थितियों के दौरान विभागों के बीच बेहतर तालमेल और त्वरित कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई। प्रशासन का मानना है कि इतने बड़े आयोजन में किसी एक विभाग के भरोसे व्यवस्था नहीं छोड़ी जा सकती। पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन, यातायात, नगर निकाय और अन्य संबंधित विभागों को एक साझा रणनीति के तहत काम करना होगा। एसओपी तैयार होने के बाद प्रशासन इसे सीधे लागू करने के बजाय पहले मॉक ड्रिल के माध्यम से परखेगा। अलग-अलग आपात स्थितियों को काल्पनिक रूप से तैयार कर यह जांचा जाएगा कि सूचना मिलने के बाद संबंधित टीमें कितनी तेजी से सक्रिय होती हैं। मॉक ड्रिल में राहत और बचाव कार्य, मेडिकल सहायता, यातायात नियंत्रण, भीड़ को सुरक्षित दिशा में ले जाने और विभागीय समन्वय की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। यदि कहीं कमी मिली तो एसओपी में बदलाव किया जाएगा। यानी प्रशासन का उद्देश्य केवल दस्तावेज तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था खड़ी करना है जो संकट की घड़ी में तुरंत काम करे। कुंभ के दौरान सबसे अधिक दबाव प्रमुख स्नान पर्वों पर रहेगा। इन दिनों हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भीड़ को अलग-अलग जोन में नियंत्रित करने, पार्किंग और यातायात व्यवस्था बनाए रखने तथा संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत होगी। हरिद्वार मेलाधिकारी सोनिका ने बताया कि सभी संबंधित विभागों के साथ चर्चा की गई है और अधिकारियों ने अपने सुझाव दिए हैं। कोशिश की जा रही है कि जल्द एसओपी तैयार कर ली जाए, ताकि कुंभ के दौरान किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार रहे। कुंभ 2027 में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ सुरक्षा की भी अग्निपरीक्षा होगी। प्रशासन की कोशिश है कि तैयारी ऐसी हो कि भीड़ कितनी भी बढ़े, व्यवस्था न चरमराए और आपात स्थिति में हर टीम बिना समय गंवाए मैदान में उतर सके।