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उत्तराखंड में 'जेनी प्रकरण' पर छिड़ा सियासी घमासान: महेंद्र भट्ट और हरक सिंह रावत में जुबानी जंग तेज

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में वर्षों पुराना और चर्चित 'जेनी प्रकरण' एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सतह पर आ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के दिग्गजों के बीच जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत के बीच जारी इस तल्ख बयानबाजी ने प्रदेश के राजनीतिक पारे को चरम पर पहुंचा दिया है। डीएनए  जांच की चुनौतियों से लेकर मानहानि के मुकदमों की चेतावनियों तक, मामला अब बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मामला अब आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर डीएनए जांच की चुनौती और मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी तक पहुंच गया है। दोनों नेताओं के बयानों ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अपने पूर्व बयान का बचाव करते हुए कहा कि जेनी प्रकरण को लेकर उन्होंने जो सवाल उठाया था, वह गलत नहीं था। उनका कहना है कि प्रदेश की जनता इस मामले में सच्चाई जानना चाहती है। भट्ट ने कहा कि पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत डीएनए जांच कराने की बात कर रहे हैं तो वह स्वयं भी डीएनए जांच के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने हरक सिंह रावत से सवाल किया कि क्या वह दोबारा डीएनए जांच कराने के लिए तैयार होंगे? महेंद्र भट्ट ने नंदप्रयाग-घाट प्रकरण को लेकर डॉ. हरक सिंह रावत की ओर से लगाए गए आरोपों को भी निराधार बताया। उन्होंने कहा कि हरक सिंह रावत को इस मामले में गलत और भ्रामक बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। भट्ट ने चेतावनी दी कि यदि उनके खिलाफ इसी तरह आरोप लगाए जाते रहे तो वह हरक सिंह रावत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने से पीछे नहीं हटेंगे। भट्ट के इस बयान से साफ है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने अपने सवाल को जनता के सामने उठाया गया सवाल बताते हुए डीएनए जांच की चुनौती को भी स्वीकार करने की बात कही। दूसरी ओर, पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर तीखा पलटवार किया। हरिद्वार जिले के पिरान कलियर और भगवानपुर में कांग्रेस की न्याय यात्रा के दौरान उन्होंने महेंद्र भट्ट पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2003 में उन पर लगाए गए आरोपों के बाद उनकी डीएनए जांच कराई जा चुकी है। इसके अलावा मामले की सीबीआई जांच भी हुई थी, जिसमें उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है।हरक सिंह रावत ने कहा कि जब उनकी डीएनए और सीबीआई जांच हो चुकी है और आरोप साबित नहीं हुए हैं तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को जेनी के बच्चे के पिता का पता लगाने के लिए अपनी डीएनए जांच कराने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने भाजपा पर राजनीतिक षड्यंत्र रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह ऐसी बयानबाजी और दबाव से डरने वाले नहीं हैं। कांग्रेस नेता ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि उनके खिलाफ चाहे कितने भी षड्यंत्र रच लिए जाएं, वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे तो उन्हें जेल भेज दे, वह कफन बांधकर राजनीति करते हैं और किसी भी दबाव से डरने वाले नहीं हैं। जेनी प्रकरण में दोनों नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। एक ओर महेंद्र भट्ट अपने सवाल को जायज बताते हुए डीएनए जांच के लिए तैयार होने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हरक सिंह रावत पहले हो चुकी जांच का हवाला देकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर ही सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल इस पूरे विवाद में दोनों नेताओं के आरोप और दावे राजनीतिक बयानबाजी के रूप में सामने आए हैं। अब देखना होगा कि यह मामला केवल जुबानी जंग तक सीमित रहता है या फिर कानूनी कार्रवाई और मानहानि के मुकदमे तक पहुंचता है।