मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिवंगत पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के आवास पहुंचकर दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति के वरिष्ठ और सम्मानित चेहरों में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का रविवार तड़के आकस्मिक निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। सीने में दर्द की शिकायत के बाद परिजन उन्हें देहरादून के ईस्ट कैनाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर मिलते ही प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और समर्थकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का सार्वजनिक जीवन जनसेवा, सामाजिक सरोकारों और आम लोगों के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित रहा। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने विशेष रूप से गरीबों, मजदूरों, कर्मचारियों और वंचित वर्ग के मुद्दों को मजबूती से उठाया। यही कारण था कि उन्हें एक जननेता के रूप में व्यापक सम्मान प्राप्त था। उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून स्थित उनके आवास पहुंचकर पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट का लोकसेवा और जनकल्याण के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा परिजनों, समर्थकों और शुभचिंतकों को इस गहरे दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी पूर्व कैबिनेट मंत्री के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट केवल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ही नहीं, बल्कि गरीबों, मजदूरों, कर्मचारियों और वंचित समाज की बुलंद आवाज थे। उन्होंने कहा कि उनका निधन कांग्रेस परिवार के साथ-साथ पूरे उत्तराखंड की राजनीति और श्रमिक आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति है। गोदियाल ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट का संघर्ष, सादगी और जनहित के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक संदेश जारी किए। नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, जनसेवा के प्रति समर्पण और सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हमेशा जनता के हितों को प्राथमिकता दी। उनके निधन से उत्तराखंड ने एक ऐसे जनप्रतिनिधि को खो दिया है, जिन्होंने अपने व्यवहार, सरल व्यक्तित्व और जनसरोकारों के कारण समाज में अलग पहचान बनाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हीरा सिंह बिष्ट उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का मिशन माना। श्रमिकों और आम जनता के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष लंबे समय तक याद किया जाएगा। यही वजह है कि उनके निधन पर राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर सभी दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, समर्थकों और आम नागरिकों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी। उनके निधन से उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में एक ऐसा शून्य पैदा हुआ है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी। जनसेवा, सादगी और सामाजिक न्याय के लिए उनका योगदान लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।