विधायक अरविंद पांडे के घर दिग्गज नेताओं की बैक-टू-बैक मुलाकातों से देहरादून का सियासी पारा चढ़ा

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देहरादून। उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी के भीतर पिछले लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान और 'अरविंद पांडे एपिसोड' अब अपने चरम पर पहुंच गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के आगामी तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। भले ही केंद्रीय नेतृत्व का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर पूरा भरोसा हो, लेकिन गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के आवास पर पार्टी के कद्दावर नेताओं की लगातार बैक-टू-बैक मुलाकातों ने संगठन से लेकर सरकार तक की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस सियासी तूफान को थामने और राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने एकजुटता का प्रदर्शन करने के लिए अब डैमेज कंट्रोल की कवायद युद्ध स्तर पर शुरू हो गई है। इसी सिलसिले में 27 मई को मुख्यमंत्री आवास पर एक बेहद गोपनीय और अति-महत्वपूर्ण हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई है।

दरअसल, पूर्व शिक्षा मंत्री और गदरपुर से पांच बार के विधायक अरविंद पांडे पिछले कई महीनों से अपनी तीखी बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनके बयानों से कई बार सरकार और संगठन असहज स्थिति में आए हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि पार्टी के भीतर अलग-अलग शक्ति केंद्र सक्रिय हैं। इस आग को हवा तब मिली जब दो दिन पहले बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी अचानक अरविंद पांडे के आवास पहुंचे। इस मुलाकात की तपिश शांत भी नहीं हुई थी कि मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत भी अरविंद पांडे से मिलने गदरपुर पहुंच गए। दोनों ही दिग्गजों की बंद कमरे में हुई लंबी बातचीत की तस्वीरों ने सोशल मीडिया से लेकर देहरादून के राजनैतिक हलकों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से ठीक पहले इन मुलाकातों को महज 'शिष्टाचार भेंट' कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। अरविंद पांडे को लंबे समय से अनिल बलूनी और त्रिवेंद्र सिंह रावत खेमे का बेहद करीबी माना जाता रहा है। ऐसे में इन कद्दावर नेताओं की मौजूदगी यह साफ इशारा कर रही है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ी सियासी खिचड़ी पक रही है। पार्टी के भीतर यह चिंता साफ तौर पर हावी है कि यदि यह अंतर्कलह और नाराजगी जल्द दूर नहीं हुई, तो आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 28 मई से 30 मई तक उत्तराखंड के तीन दिवसीय संगठनात्मक दौरे पर आ रहे हैं। उनके आगमन से ठीक 24 घंटे पहले, यानी 27 मई को मुख्यमंत्री आवास पर होने वाली बैठक को बीजेपी की अंतर्कलह के समापन के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस महामंथन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सांसद अनिल बलूनी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश महामंत्री संगठन अजय कुमार एक मेज पर बैठेंगे। बैठक का एकमात्र एजेंडा राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने ऑल-इज-वेल (सब कुछ ठीक है) का संदेश देना और आंतरिक मतभेदों को हमेशा के लिए दफन करना है।

दूसरी तरफ, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट लगातार मीडिया के सामने पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी या खेमेबाजी से साफ इनकार कर रहे हैं। उन्होंने संगठन का बचाव करते हुए कहा बीजेपी एक कैडर-बेस्ड और अनुशासित पार्टी है, जहां लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन होता है। वरिष्ठ नेताओं का किसी विधायक के घर जाना एक सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा है। यदि किसी स्तर पर कोई थोड़ी-बहुत नाराजगी या गिले-शिकवे रहे भी होंगे, तो परिवार के भीतर बैठकर उन्हें सम्मानपूर्वक दूर कर लिया जाएगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि बीजेपी आलाकमान इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। अब सबकी निगाहें आज होने वाली मुख्यमंत्री आवास की बैठक और उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के तीन दिवसीय मैराथन दौरों पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी नेतृत्व इस सियासी असंतोष का कोई स्थायी समाधान निकाल पाता है या फिर यह चिंगारी 2027 के महासमर से पहले अंदर ही अंदर सुलगती रहेगी।