Apr 20, 2026

उधम सिंह नगर से अतिक्रमण हटाओ अभियान का आगाज: अब तक 580 अवैध निर्माण ध्वस्त और प्रशासन सख्त

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उत्तराखंड में एक बार फिर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए ‘बुलडोजर अभियान’ को तेज कर दिया है। इस बार अभियान की शुरुआत कुमाऊं मंडल के उधम सिंह नगर जिला से की गई है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 580 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जा चुका है। इनमें छोटे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों की दीवारें और अन्य धार्मिक ढांचे शामिल हैं, जो सरकारी जमीनों पर बिना अनुमति बनाए गए थे। इसके अलावा लगभग 200 और ऐसे मामलों की पहचान की गई है, जिन पर या तो अदालत में सुनवाई चल रही है या प्रशासन जल्द कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

सरकार का फोकस फिलहाल तराई क्षेत्र के जिलों देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल पर है, जहां वर्षों से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल के महीनों में इन इलाकों में बड़े पैमाने पर सर्वे और चिन्हांकन किया गया, जिसके बाद अब अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जमीन के रिकॉर्ड की गहन जांच की जाए और जहां भी अवैध कब्जा मिले, वहां बिना देरी कार्रवाई की जाए। अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की भी तैनाती की जा रही है। उधम सिंह नगर में हाल ही में हुई कार्रवाई इसका उदाहरण है, जहां तीन अवैध निर्माण की सूचना पर पहुंची टीम को मौके पर सात कब्जे मिले, जिन्हें तत्काल हटाया गया। जिला प्रशासन का कहना है कि आगे भी ऐसे मामलों में बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस अभियान का एक अहम पहलू उन ढांचों की जांच भी है, जो वक्फ बोर्ड के नाम पर सरकारी जमीनों पर बनाए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 100 से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें से 30 केवल देहरादून में स्थित हैं। इन मामलों में दस्तावेजों की सत्यता और जमीन के स्वामित्व की गहन जांच कराई जा रही है। मुख्यमंत्री धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि कोई निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई तय है, चाहे वह किसी भी संस्था या नाम से जुड़ा हो। उन्होंने दोहराया कि सरकार ‘स्थान’ नहीं बल्कि ‘अतिक्रमण’ देखती है और उसी आधार पर कार्रवाई करती है। प्रशासन के अनुसार, कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया के चलते कार्रवाई में समय लग रहा है। लगभग 200 मामलों में अदालत की अनुमति का इंतजार है और जैसे ही आदेश मिलते हैं, कार्रवाई तेज कर दी जाएगी। अवैध निर्माण हटाओ अभियान के नोडल अधिकारी का कहना है कि यह एक सतत प्रक्रिया है और सरकार की मंशा साफ है सरकारी जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराना। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी राज्य में बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था, जिसमें सड़कों, नदियों के किनारे और शहरी क्षेत्रों में बने अवैध ढांचों को हटाया गया था। अब एक बार फिर इस अभियान के तेज होने से प्रदेश की सियासत और आम जनता दोनों की नजरें इस पर टिकी हैं। जहां एक ओर सरकार इसे कानून का राज स्थापित करने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर सवाल भी उठा रहा है। हालांकि सरकार का दावा है कि पूरी कार्रवाई पारदर्शी और नियमों के तहत की जा रही है। आने वाले समय में इस अभियान के और तेज होने के संकेत हैं, जिससे प्रदेश में अतिक्रमण की तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।