झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद: राजधानी रांची में हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई हुई तेज

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रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब गंभीर कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले चुका है। 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव के दौरान हुए भारी बवाल और पथराव के सिलसिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 300 अज्ञात युवाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

रांची पुलिस अधीक्षक पारस राणा के अनुसार, यह कार्रवाई धारा 144 (निषेधाज्ञा) का उल्लंघन करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करने के संगीन आरोपों के तहत विधानसभा थाने में दर्ज की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची प्रशासन और पुलिस तंत्र पूरी तरह एक्शन मोड में है। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और एसपी राकेश रंजन ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन में शामिल उपद्रवी तत्वों की पहचान के लिए घटनास्थल और आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों और वीडियो फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि 10 अगस्त के बवाल में 14 पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे। बता दें कि इससे पहले भी पुलिस ने करीब 100 नामजद और 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर मामला दर्ज किया था। दूसरी ओर, मुकदमे और पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद बीते 20 दिनों से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए सैकड़ों छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे सीबीआई जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की अपनी मांग पर कायम हैं। अभ्यर्थी न्याय मंच के अध्यक्ष रामअवतार महतो ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 12 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता देवेंद्र नाथ महतो की सेहत से जुड़ी जानकारियां छिपाई जा रही हैं और प्रदर्शनकारियों को अस्पताल में उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा। रांची पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे फुटेज के आधार पर उपद्रवियों और हिंसा भड़काने वालों के चेहरे साफ होंगे, प्राथमिकी में और लोगों के नाम भी जोड़े जाएंगे। फिलहाल, पूरी राजधानी में चौकसी बढ़ा दी गई है और पुलिस बल को अलर्ट पर रखा गया है।