Mar 27, 2026

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने दी सफलता की जानकारी, 500 जिलों में जनसुनवाई के दौरान 15,000 महिलाओं को मिली तत्काल राहत

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देहरादून। अब पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए दर-दर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राष्ट्रीय महिला आयोग की नई पहल ‘राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार’ के तहत महिलाओं को उनके क्षेत्र में ही त्वरित न्याय मिलेगा। इस अभियान के शुरू होने के बाद अब तक देशभर में हजारों महिलाओं को मौके पर ही राहत और न्याय मिल चुका है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हाल ही में दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में इस पहल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 9 से 14 मार्च तक देश के 500 जिलों में जनसुनवाई शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 15,000 महिलाओं की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा किया गया। असंगठित कामगार महिलाओं के लिए बड़ी पहल आयोग ने पहली बार असंगठित क्षेत्र की कामगार महिलाओं के लिए भी प्रदेश स्तर पर शिकायत एवं अन्वेषण कमेटी का गठन किया है। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय स्तर पर अलग-अलग कमेटियां बनाई गई हैं। इन कमेटियों का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं तक पहुंचना है जो अपनी शिकायत आयोग तक नहीं पहुंचा पाती थीं।

अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा, “जो मामले स्थानीय स्तर पर नहीं सुलझ पाते, उनमें राष्ट्रीय महिला आयोग स्वयं सक्रिय भूमिका निभाता है। हमारी टीम मौके पर पहुंचकर मामले की सुनवाई करती है।” हाल ही में हिमाचल प्रदेश के एक मामले में आयोग की टीम ने खुद मौके पर जाकर समस्या का निपटारा किया। आयोग सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के साथ हर तीन-चार महीने में बैठक आयोजित करता है। इन बैठकों में न केवल लंबित मामलों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाता है, बल्कि पीड़ित महिलाओं के साथ पुलिसकर्मियों के व्यवहार को संवेदनशील बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।केंद्र शासित प्रदेशों में अब स्थानीय कमेटियां शिकायत दर्ज कर आयोग तक पहुंचाएंगी। इसके बाद आयोग की टीम कमिश्नर, जिलाधिकारी (डीएम), पुलिस अधीक्षक (एसपी) और पीड़िता को साथ बुलाकर समस्या का समाधान करेगी। राष्ट्रीय महिला आयोग की इस पहल से महिलाओं को अब लंबी कानूनी प्रक्रिया और बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। ‘आपके द्वार’ कार्यक्रम के माध्यम से आयोग का प्रयास है कि हर पीड़ित महिला को सुलभ, तेज और संवेदनशील न्याय उपलब्ध हो। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, असंगठित कामगार महिलाओं और दूर-दराज के इलाकों की महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। आयोग का मानना है कि न्याय की पहुंच हर महिला तक होनी चाहिए, चाहे वह किसी भी कोने में रहती हो। राष्ट्रीय महिला आयोग की यह सक्रिय भूमिका महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।