बिहार कैबिनेट विस्तार में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री

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पटना। बिहार की राजनीति में आज एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल का भव्य शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हुआ। पूरे समारोह में एनडीए की एकजुटता, शक्ति प्रदर्शन और आगामी राजनीतिक रणनीति की झलक साफ दिखाई दी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित नए मंत्रिमंडल में कुल 32 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद रहे।  इससे पहले गांधी मैदान में सुबह से ही हजारों की संख्या में समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। एनडीए के झंडों और बैनरों से पूरा इलाका सजा हुआ था। सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। मंत्रिमण्डल में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड से 16-16 मंत्रियों को शामिल किया गया। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को भी प्रतिनिधित्व दिया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल सरकार गठन भर नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनावों के बाद एनडीए की नई राजनीतिक रणनीति का संकेत भी है। गठबंधन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सामाजिक समीकरणों और राजनीतिक अनुभव दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा।

निशांत कुमार की एंट्री बनी सबसे बड़ी चर्चा
समारोह की सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में औपचारिक एंट्री को लेकर रही। निशांत कुमार ने मंत्री पद की शपथ लेकर बिहार की राजनीति में एक नई पारी की शुरुआत कर दी है। जैसे ही निशांत कुमार मंच पर पहुंचे, गांधी मैदान तालियों से गूंज उठा। बाद में जब नीतीश कुमार मंच पर पहुंचे तो निशांत ने सार्वजनिक रूप से पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। 

इन नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ
समारोह में विजय सिन्हा, श्रवण कुमार, दिलीप कुमार जायसवाल, लेसी सिंह, भगवान सिंह कुशवाहा, अरुण शंकर प्रसाद, मदन सहनी, डॉ. संतोष कुमार सुमन, रमा निषाद, रत्नेश सदा, कुमार शैलेन्द्र, शीला कुमारी, केदार प्रसाद गुप्ता और लखेन्द्र कुमार रौशन सहित कई वरिष्ठ और नए चेहरों ने मंत्री पद की शपथ ली। इस मंत्रिमंडल में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरों को भी मौका दिया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार प्रशासनिक अनुभव और नई ऊर्जा के मिश्रण के साथ आगे बढ़ना चाहती है।