Mar 31, 2026

उत्तराखंड सरकार ने पंचायतों के लिए 93.14 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की, ग्रामीण विकास कार्यों को मिलेगी नई गति

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देहरादून। उत्तराखंड की त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से बड़ी वित्तीय सौगात दी गई है। जल शक्ति मंत्रालय ने 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य की पंचायतों के लिए 139 करोड़ रुपये से अधिक के ‘टाइड ग्रांट’ की सिफारिश की है, वहीं राज्य सरकार ने भी पंचायतों के लिए 93.14 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। पंचायती राज निदेशालय उत्तराखंड द्वारा जारी आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली किस्त की अवशेष राशि और दूसरी किस्त को मिलाकर कुल 93,14,83,000 रुपये ‘अनटाइड ग्रांट’ के रूप में आवंटित किए गए हैं। इस धनराशि का उपयोग पंचायतें अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर सकेंगी।

धनराशि का वितरण ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों के बीच किया गया है। ग्राम पंचायतों को लगभग 70.25 करोड़ रुपये, क्षेत्र पंचायतों को 9.16 करोड़ रुपये और जिला पंचायतों को करीब 13.74 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जनपदवार भी बजट का वितरण किया गया है, जिसमें हरिद्वार को 7.73 करोड़, पौड़ी गढ़वाल को 7.46 करोड़, अल्मोड़ा को 8.23 करोड़, ऊधम सिंह नगर को 6.53 करोड़, पिथौरागढ़ को 6.39 करोड़ और देहरादून को 4.45 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। पंचायती राज निदेशक निधि यादव ने सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि धनराशि को तत्काल कोषागार पोर्टल (IFMS) के माध्यम से पंचायतों के खातों में भेजा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवंटन में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से जारी ‘टाइड ग्रांट’ का उपयोग विशेष रूप से पेयजल और स्वच्छता से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। इसके तहत ग्राम पंचायतों को 102.37 करोड़, ब्लॉक पंचायतों को 13.59 करोड़ और जिला पंचायतों को 20.61 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा पहली किस्त की रुकी हुई राशि में से 2.89 करोड़ रुपये जारी करने की भी अनुशंसा की गई है। इस फंड के जारी होने से ग्रामीण क्षेत्रों में सीसी सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक भवनों का रखरखाव और पेयजल योजनाओं जैसे कार्य तेजी से पूरे हो सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे पंचायत स्तर पर विकास को मजबूती मिलेगी और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।