गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में जैसे ही दो दिवसीय सत्र का आगाज हुआ, बाहर का सियासी तापमान अचानक उबाल पर आ गया। एक तरफ जहाँ सदन के भीतर दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी को श्रद्धांजलि दी जा रही थी और मुख्यमंत्री 7,000 करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट पेश करने की तैयारी में थे, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और विभिन्न संगठनों ने विधानसभा का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्कामुक्की भी देखने को मिली।
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा के दो दिवसीय सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन के बाहर राजनीतिक हलचल तेज हो गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने, महंगाई, बेरोजगारी और महिला सुरक्षा सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। विधानसभा घेराव की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्कामुक्की हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद कांग्रेस विधायक विधानसभा परिसर की सीढ़ियों पर धरने पर बैठ गए। सत्र के पहले दिन सदन के भीतर दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी को श्रद्धांजलि दी गई। वहीं, बाहर विपक्ष सरकार की नीतियों और जनहित से जुड़े सवालों को लेकर मुखर नजर आया। कांग्रेस ने दो दिन के सत्र को अपर्याप्त बताते हुए इसकी अवधि बढ़ाने की मांग भी दोहराई। कांग्रेस विधायक हाथों में सरकार विरोधी नारे लिखी तख्तियां लेकर विधानसभा परिसर पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान ‘अंकिता भंडारी को न्याय दो’ जैसे नारे लगाए गए। पार्टी नेताओं ने महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक विधानसभा की सीढ़ियों पर धरने पर बैठ गए। आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सवालों से बचना चाहती है और इसी कारण सत्र की अवधि सीमित रखी गई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व जनता से जुड़े सवालों को सदन में उठाना और सरकार से जवाब मांगना है। अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि पीड़िता को न्याय कब मिलेगा। उन्होंने मामले से जुड़े व्यक्ति को संवैधानिक पद दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। ये कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप और सवाल हैं; संबंधित पक्ष का जवाब तथा मामले से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक स्थिति अलग से देखी जानी चाहिए। कांग्रेस ने विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग को प्रमुखता से उठाया है। सोमवार देर शाम भराड़ीसैंण में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के शासकीय आवास पर कांग्रेस विधानमंडल दल की बैठक हुई थी। बैठक में विधायकों ने एकमत होकर सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग का समर्थन किया। आर्य ने कहा कि दो दिन का सत्र जनता के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, विधानसभा सत्र आयोजित करने में सरकारी संसाधन और जनता की गाढ़ी कमाई खर्च होती है, इसलिए कार्यवाही का उपयोग जनहित के विषयों पर सार्थक चर्चा के लिए होना चाहिए। कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर नियम 58 और नियम 310 के तहत चर्चा कराने की मांग करने की तैयारी भी की है। पार्टी का कहना है कि इन विषयों पर सदन में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। विधानसभा घेराव की कोशिशों के बीच प्रधान संगठन से जुड़े कुछ प्रदर्शनकारियों को गैरसैंण कूच के दौरान हिरासत में लिए जाने की सूचना भी सामने आई। विधानसभा क्षेत्र के आसपास पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई और बैरिकेडिंग के माध्यम से प्रदर्शनकारियों की आवाजाही नियंत्रित करने का प्रयास किया। सत्र के दौरान सरकार की ओर से सात हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट पेश किया जाना भी कार्यसूची में शामिल था। ऐसे में सदन के भीतर बजट और बाहर विपक्ष के प्रदर्शन के बीच गैरसैंण का राजनीतिक माहौल गर्म रहा। अब सत्र की शेष कार्यवाही में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष किन मुद्दों को सदन में उठा पाता है, सरकार उन पर क्या जवाब देती है और सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग पर क्या रुख सामने आता है।

