Apr 10, 2026

उत्तराखंड के श्रमिकों को अब विदेशों में मिलेगा रोजगार: सीएम धामी ने कौशल विकास और विदेश मंत्रालय से समन्वय पर दिया जोर

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देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे निरंतर पलायन की समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने अब 'कौशल विकास' और 'डिजिटल गवर्नेंस' का सहारा लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान 'श्रमिक सेवा मोबाइल ऐप' का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 8,005 श्रमिकों के बैंक खातों में कुल 17.25 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे हस्तांतरित की।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता अनुदान वितरण में पूर्ण पारदर्शिता लाना है। इसी उद्देश्य से अब ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया को बंद कर शत-प्रतिशत ऑनलाइन निस्तारण और डीबीटी प्रणाली को अपनाया गया है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में अब तक कुल 19,833 लाभार्थियों को 47.14 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने 'उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड' को निर्देश दिए कि वे अधिक से अधिक श्रमिकों तक अपनी पहुँच बढ़ाएं। पलायन रोकने की रणनीति पर चर्चा करते हुए सीएम धामी ने कहा कि केवल आर्थिक मदद पर्याप्त नहीं है, बल्कि श्रमिकों को स्वावलंबी बनाना आवश्यक है। उन्होंने बोर्ड के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पर्वतीय क्षेत्रों के श्रमिकों को उनकी स्थानीय जरूरत के अनुसार प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, मिस्त्री और कारपेंटर जैसे क्षेत्रों में पेशेवर प्रशिक्षण दिया जाए। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने एक बड़ा विजन साझा करते हुए कहा कि राज्य के कुशल श्रमिकों और उनके आश्रितों को केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रोजगार दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में पंजीकृत एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई की जाएगी। देवभूमि उत्तराखंड की वैश्विक पहचान 'योग और वेलनेस' को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। सीएम ने निर्देश दिए कि आगामी सत्र से श्रमिकों के बच्चों को योग एवं वेलनेस क्षेत्र में नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाए। इसके अलावा, श्रमिकों को 'पीएम स्वनिधि योजना' से जोड़ने और उनके कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि उनके दैनिक रोजगार में कोई व्यवधान न आए। श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने बोर्ड की प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि 'UKLCCMS' पोर्टल के माध्यम से अब तक 16,000 संस्थानों का पंजीकरण हो चुका है। बोर्ड के पास वर्तमान में उपकर के रूप में 324 करोड़ रुपये की धनराशि जमा है, जिसका उपयोग पूरी तरह से श्रमिक कल्याण में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भविष्य में सामग्री वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए 'लाइव फोटो' और 'जियो-ट्रैकिंग' जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस डिजिटल पहल और कौशल विकास कार्यक्रम से न केवल उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में 'रिवर्स पलायन' को बल मिलेगा, बल्कि राज्य का श्रमिक वर्ग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए तैयार होगा।