सर्विस वोटर्स का नहीं होगा दोबारा सत्यापन, उत्तराखंड मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जारी किया महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

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देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बीच सैन्य कर्मियों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि सर्विस वोटर श्रेणी में पंजीकृत सैन्य कर्मियों को एसआईआर की प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। उनका नाम पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची में पहले की तरह सर्विस वोटर श्रेणी में सुरक्षित रहेगा।

राज्य में इन दिनों मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया जा रहा है और उनके नामों का वर्ष 2003 की मतदाता सूची समेत अन्य अभिलेखों से मिलान किया जा रहा है। इसी बीच सैन्य बहुल राज्य उत्तराखंड में यह सवाल उठने लगे थे कि क्या सेना और अर्द्धसैनिक बलों में कार्यरत जवानों को भी पुनः सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इन आशंकाओं पर विराम लगाते हुए निर्वाचन विभाग ने साफ किया है कि भारतीय सेना, अर्द्धसैनिक बलों और अन्य पात्र सेवाओं में कार्यरत जिन कर्मियों का नाम सर्विस वोटर के रूप में दर्ज है, उनका एसआईआर नहीं किया जाएगा। विभाग के अनुसार इन कर्मियों का पहले से ही आधिकारिक सत्यापन हो चुका होता है, इसलिए उन्हें दोबारा इस प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता नहीं है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि सर्विस वोटरों की निर्वाचन संबंधी स्थिति यथावत बनी रहेगी और पुनरीक्षण के बाद जारी होने वाली मतदाता सूची में उनका नाम पूर्ववत दर्ज रहेगा। इससे राज्य के हजारों सैन्य कर्मियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी। हालांकि, सेना या अन्य सेवाओं से सेवानिवृत्त होकर अपने गृह क्षेत्र में वापस आ चुके पूर्व सैनिकों को सामान्य मतदाता की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अन्य नागरिकों की तरह किया जाएगा और उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक दस्तावेज एवं विवरण उपलब्ध कराने होंगे। निर्वाचन विभाग के इस स्पष्टीकरण के बाद सैन्य समुदाय में व्याप्त भ्रम की स्थिति समाप्त हो गई है। माना जा रहा है कि इस निर्णय से एसआईआर प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी, वहीं सैन्य कर्मियों के मतदान अधिकारों की निरंतरता भी सुनिश्चित होगी।