उत्तराखंड भाजपा के आंतरिक सर्वे में 12 से अधिक मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन पर उठे गंभीर सवाल

Blog
 Image

देहरादून। उत्तराखंड में साल 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने मौजूदा विधायकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए भाजपा इस बार किसी भी तरह के जोखिम के मूड में नहीं है। पार्टी हाईकमान ने साफ संदेश दे दिया है कि इस बार टिकट केवल चेहरे या रसूख पर नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से जमीनी प्रदर्शन, विकास कार्यों की रफ्तार और जनता के बीच स्वीकार्यता के आधार पर ही मिलेगा। इसी कड़ी में केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व आगामी नवंबर और दिसंबर के महीनों में दो बड़े आंतरिक महासर्वे कराने जा रहा है। यह दोनों सर्वे ही तय करेंगे कि किस विधायक को दोबारा चुनावी मैदान में उतारा जाएगा और किसका पत्ता साफ होगा।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक,भाजपा अब तक तीन गोपनीय आंतरिक सर्वे करा चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन शुरुआती सर्वे में 12 से अधिक मौजूदा विधायकों की कार्यशैली, विकास कार्यों में ढिलाई और जनसंपर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कई क्षेत्रों में स्थानीय जनता के बीच असंतोष और सुस्ती की शिकायतें सीधे हाईकमान तक पहुंची हैं। इस नकारात्मक फीडबैक को देखते हुए संगठन ने 'सिटिंग' विधायकों को संभलने का एक आखिरी और अंतिम अवसर दिया है। सभी विधायकों को कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे आगामी 31 अक्टूबर तक हर हाल में अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर जनता की समस्याएं सुनें, लंबित पड़े कार्यों को पूरा करवाएं और धरातल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएं। भाजपा इस बार उन सीटों पर सबसे ज्यादा पसीना बहा रही है, जहां 2022 के चुनाव में जीत-हार का अंतर बेहद मामूली था या जहां पार्टी को शिकस्त झेलनी पड़ी थी। संगठन इन क्षेत्रों के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने में जुटा है। प्रमुख सीटें में जसपुर, बाजपुर, श्रीनगर, टिहरी, गदरपुर, खटीमा, किच्छा, नरेंद्रनगर, चकराता, भगवानपुर, पिरान कलियर और धारचूला शामिल है। अक्टूबर तक विधायकों का प्रदर्शन सुधारने और विकास कार्यों को गति देने के लिए राज्य सरकार ने भी अपने स्तर पर पूरी ताकत झोंक दी है। विधायकों की मांग पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास योजनाओं की मंजूरी की प्रक्रिया को सुपरफास्ट मोड में डाल दिया है। पिछले महज एक महीने के भीतर प्रदेश में ₹7,300.28 करोड़ की विभिन्न विकास योजनाओं को हरी झंडी दी जा चुकी है। इसमें सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें शामिल हैं। मुख्यमंत्री धामी द्वारा पिछले चार वर्षों में की गई 4,323 घोषणाओं में से 2,444 पर शासनादेश जारी किए जा चुके हैं। बाकी बची घोषणाओं को भी आगामी जून महीने तक हर हाल में धरातल पर उतारने के सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अक्टूबर तक विधायकों का रिपोर्ट कार्ड और मुख्यमंत्री की घोषणाओं की जमीनी हकीकत ही उत्तराखंड भाजपा का भविष्य तय करेगी। स्पष्ट है कि भाजपा अभी से 'मिशन 2027' के लिए हर सीट पर जीत का ब्लूप्रिंट तैयार कर चुकी है, जहां सुस्त रहने वालों के लिए कोई जगह नहीं होगी।