उत्तराखंड के प्रसिद्ध कुंजापुरी मेले में प्रसिद्ध पंजाबी गायक दलेर मेहंदी को मंच पर हुई सार्वजनिक फटकार का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद ने राजनीतिक गलियारों से लेकर बॉलीवुड जगत तक हलचल मचा दी है। बढ़ते विरोध और तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच अब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को संभालने की पहल की है।
पंजाबी गायक दलेर मेहंदी को मंच पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा फटकार लगाए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। विवाद अब सांस्कृतिक आयोजन की सीमाओं से निकलकर राजनीतिक और फिल्मी जगत तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर इस प्रकरण को लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि वह गायक दलेर मेहंदी और मीका सिंह से स्वयं बातचीत करेंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पूरे मामले पर सबकी निगाहें टिक गई हैं। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री धामी से दलेर मेहंदी प्रकरण को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने दोनों गायकों से बात करने की बात कही। मुख्यमंत्री के इस रुख को विवाद के बीच संवाद स्थापित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस मामले में आगे क्या निर्णय सामने आता है, यह बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा।दलेर मेहंदी के समर्थन में अभिनेता अनुपम खेर का बयान भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। उन्होंने कहा कि वह दलेर मेहंदी को पिछले 25 से 30 वर्षों से जानते हैं और वह बड़े कलाकार हैं। अनुपम खेर ने स्पष्ट किया कि वह कुंजापुरी मेले के कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे, इसलिए वहां वास्तव में क्या हुआ, इसकी उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि दलेर मेहंदी ने प्रस्तुति के दौरान गीतों के साथ होंठ मिलाकर गाया हो, लेकिन उनकी तबीयत पिछले दो-तीन वर्षों से ठीक नहीं चल रही है। अनुपम खेर के अनुसार, संभव है कि दलेर मेहंदी अपने वादे के मुताबिक कार्यक्रम में पहुंचे हों, लेकिन किसी कलाकार के बारे में सार्वजनिक मंच पर आरोप लगाने का तरीका उचित नहीं है। उनके बयान ने विवाद में कलाकार के सम्मान और सार्वजनिक व्यवहार का मुद्दा प्रमुखता से उठा दिया है। अभिनेता राजपाल यादव का बयान भी इस विवाद के बीच सामने आया है। उन्होंने कहा कि मंच पर किसी गायक के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता। कला को खरीदा नहीं जा सकता, क्योंकि कला जीवन है और जीवन का सम्मान किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर प्रसारित बयान में राजपाल यादव ने दलेर मेहंदी के शराब नहीं पीने और उनके स्वास्थ्य की स्थिति का भी उल्लेख किया। इन प्रतिक्रियाओं के बाद विवाद केवल प्रस्तुति को लेकर नहीं, बल्कि कलाकार के साथ सार्वजनिक व्यवहार और उसकी गरिमा को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। वही विवाद बढ़ने के बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान उन्हें लगा था कि दलेर मेहंदी नशे में हैं, लेकिन उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उनकी स्थिति के पीछे क्या कारण हो सकता है। बाद में उन्हें बताया गया कि गायक की तबीयत खराब थी। उनियाल ने कहा कि यदि दलेर मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो आयोजकों या संबंधित लोगों को इसकी जानकारी पहले देनी चाहिए थी अथवा उन्हें कार्यक्रम में नहीं आना चाहिए था। मंत्री के अनुसार, कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए 35 लाख रुपये दिए गए थे और होटल में ठहरने की अलग व्यवस्था भी की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य संगीत या कला को बदनाम करना नहीं था। उनका कहना था कि जब दलेर मेहंदी करीब 45 मिनट तक प्रस्तुति नहीं दे पाए, तो जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने उन्हें टोका। उनियाल ने यह भी कहा कि कलाकार का सम्मान होना चाहिए, लेकिन कलाकार को भी अपने सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। इस पूरे प्रकरण में एक ओर कलाकार के सम्मान और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर आयोजन में प्रस्तुति, स्वास्थ्य और दर्शकों के प्रति जिम्मेदारी का मुद्दा भी सामने है। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दलेर मेहंदी और मीका सिंह से स्वयं बात करने की घोषणा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री की पहल से विवाद शांत होता है या यह मामला उत्तराखंड की सांस्कृतिक और राजनीतिक चर्चाओं में आगे भी बना रहता है। फिलहाल, कुंजापुरी मेले का यह प्रकरण कला के सम्मान, आयोजन की जवाबदेही और सार्वजनिक मंच पर जिम्मेदार व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।

